Sunday, January 28, 2018

जुडने के ठिकाने



धूप हो या धूल
मस्त है जीवन
साथीयों से मीले जब
अनन्द मनाते हम
कौन बडाछोटा है कौन
दिल से रिस्ता निभाते हम
खेलखेल में मिताते सबकुछ
उँचनिंचका वो सिमाएं भी हम
जुडने के ठिकाने हमारा
सायद सबको लुभाते हम ।

१२।८।२०१७

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