Thursday, December 28, 2017

जल का बुंद





टप टप टपकती
जल का बुंद
दिल से दिलतक
बन के मधुर संगीत
पहुंचती वो एहसास
जीने की हर राहेपर
चम्के ज्योती जल में
रंग भरे तन में
बुंद बुंद मील के
चलते रास्ते बना के

१२।२७।२०१७

Tuesday, December 26, 2017

उम्र का लिहाज





सन्तती के प्यार में भुलती उम्र क्या चीज है
कर्म करे तो भी उम्र आँख की धूल होती है  ।

पुस्तैनी में दकारते बृद्धाको सम्मान दे न सकती
बृद्धाश्रम, धर्मशाला दीखाते समय की ढोंग करती ।

कहानी जुवान की हरवक्त तोडमरोडती मुखौटामें
सच कडवा होती मुह फिरकर चलती बीच रास्तेमें ।

कहने का कुछ न बचे खाने को कुछ न मीलते
लकडी के सहारे बचे उम्र को वेवश बोझ उठाते ।

१२।२६।२०१७

पेड



कर्म से हारा
विवश ये जीवन
पेड काटते
भुखे हैं बालबच्चें
कैसे लौटूँ घर में ।

धन्य है पेड
घाव पीडा सहते
ईश्वर जैसे
फिर भी प्यार देते
जीने की वास्ता देते ।

१२।२६।२०१७

मिट्टी


मिट्टी


बिन्दी बने मिट्टी जब ललाटमें
जीवन चमकते जीने की चाहतसे
रिस्ते नाते हर मोड रास्ता बनते
अपनी मिट्टीके मिठ्ठी सुगन्धसे ।

पदचाप गुँजते मिट्टी रंग उडाते
संगम बनते सभ्यता जब पर्व आते
जल सिंचते मिट्टीको जब प्यार बनके
मिट्टीको पहचाने तब जीवन धन्य होते ।
१२।१८।२०१७

जुडने के ठिकाने

धूप हो या धूल मस्त है जीवन साथीयों से मीले जब अनन्द मनाते हम कौन बडा ,  छोटा है कौन दिल से रिस्ता निभाते हम खेलखेल में मित...