टप टप टपकती
जल का बुंद
दिल से दिलतक
बन के मधुर संगीत
पहुंचती वो एहसास
जीने की हर राहेपर
चम्के ज्योती जल में
रंग भरे तन में
बुंद बुंद मील के
चलते रास्ते बना के
१२।२७।२०१७
दील की हर धडकन, पानी के बूंद जैसे, जीवन काे सिंचती, वाे एहसास दीलाती कीतनी रंग में, कीस पल में, काेही न जानती, एेसे में एक कलम उठती ।
धूप हो या धूल मस्त है जीवन साथीयों से मीले जब अनन्द मनाते हम कौन बडा , छोटा है कौन दिल से रिस्ता निभाते हम खेलखेल में मित...