मिट्टी
बिन्दी बने मिट्टी जब ललाटमें
जीवन चमकते जीने की चाहतसे
रिस्ते नाते हर मोड रास्ता बनते
अपनी मिट्टीके मिठ्ठी सुगन्धसे ।
पदचाप गुँजते मिट्टी रंग उडाते
संगम बनते सभ्यता जब पर्व आते
जल सिंचते मिट्टीको जब प्यार बनके
मिट्टीको पहचाने तब जीवन धन्य होते ।
१२।१८।२०१७
No comments:
Post a Comment