मन करता कुछ नयां देखें
हरपल चलता कदम नयां राह धुंदते
कोही चले मेरे कदम पे कदम मीला के
क्यूं मन दुखाते आज साथ ना भी हो कल
मीलते !
१।२३।२०१८
दील की हर धडकन, पानी के बूंद जैसे, जीवन काे सिंचती, वाे एहसास दीलाती कीतनी रंग में, कीस पल में, काेही न जानती, एेसे में एक कलम उठती ।
धूप हो या धूल मस्त है जीवन साथीयों से मीले जब अनन्द मनाते हम कौन बडा , छोटा है कौन दिल से रिस्ता निभाते हम खेलखेल में मित...
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